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PET परीक्षा में अभ्यर्थियों को फिर लगानी पड़ेगी लंबी दौड़, 200 किलोमीटर से अधिक दूर मिले परीक्षा केंद्र; बदायूं के कई छात्रों को मेरठ बुलाया।

 


Report - Kartavya Path Times 

बदायूं। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के सामने परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चुनौती भी खड़ी हो गई है। अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित परीक्षा को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, बदायूं के कई अभ्यर्थियों को मेरठ में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के लिए 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। दूर-दराज के केंद्र मिलने से अभ्यर्थियों में यात्रा खर्च, समय और परीक्षा के दिन की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।


अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी में पहले ही काफी समय और धन खर्च होता है। ऐसे में गृह जनपद से काफी दूर केंद्र मिलने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले और सीमित संसाधनों वाले अभ्यर्थियों के लिए यह चुनौती और बड़ी हो सकती है।


दूरी बढ़ने से खर्च और परेशानी का गणित


यदि किसी अभ्यर्थी को बदायूं से मेरठ तक लगभग 200 से 250 किलोमीटर की एक तरफ की दूरी तय करनी पड़ती है, तो आने-जाने में कुल 400 से 500 किलोमीटर तक सफर करना पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक दूरी आवंटित परीक्षा केंद्र और यात्रा के मार्ग पर निर्भर करेगी।


उदाहरण के तौर पर, यदि आने-जाने का कुल सफर 450 किलोमीटर हो और वाहन का औसत किराया या यात्रा खर्च 2 से 3 रुपये प्रति किलोमीटर के बराबर पड़े, तो यात्रा पर करीब 900 से 1,350 रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा भोजन, स्थानीय परिवहन और जरूरत पड़ने पर होटल में रुकने का खर्च अलग होगा। यह केवल अनुमानित गणना है, वास्तविक खर्च परिवहन के साधन और टिकट दर पर निर्भर करेगा।


अभ्यर्थियों को क्या होगा नुकसान?


दूर परीक्षा केंद्र मिलने से अभ्यर्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


- आर्थिक बोझ: आने-जाने, भोजन और ठहरने पर अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

- समय की बर्बादी: लंबी यात्रा के कारण परीक्षा की तैयारी और आराम के लिए समय कम मिल सकता है।

- थकान और तनाव: रातभर यात्रा करने या सुबह समय पर केंद्र पहुंचने की चिंता से परीक्षा के दौरान एकाग्रता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

- महिला अभ्यर्थियों की चुनौती: अकेले सफर करने वाली छात्राओं को सुरक्षा, परिवहन और ठहरने की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

- परिवार पर अतिरिक्त खर्च: कम आय वाले परिवारों को अभ्यर्थी के साथ किसी परिजन को भेजने की स्थिति में दो लोगों का खर्च उठाना पड़ सकता है।


दूर केंद्र मिलने के कुछ फायदे भी


हालांकि लंबी दूरी पर परीक्षा केंद्र मिलने के नुकसान अधिक दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसके फायदे भी हो सकते हैं। बड़े शहरों में परिवहन के अधिक विकल्प उपलब्ध होने से कुछ अभ्यर्थियों को केंद्र तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। यदि परीक्षा केंद्र मुख्य रेलवे स्टेशन या बस अड्डे के नजदीक है, तो स्थानीय यात्रा आसान हो सकती है।


इसके अलावा, गृह जनपद से बाहर परीक्षा देने से अभ्यर्थियों को नए शहर में यात्रा और व्यवस्था संभालने का अनुभव मिलता है। हालांकि ये फायदे केंद्र की वास्तविक स्थिति और परिवहन सुविधाओं पर निर्भर करेंगे तथा अतिरिक्त खर्च की भरपाई जरूरी नहीं कि कर पाएं।


परीक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल


अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा केंद्र का आवंटन एक महत्वपूर्ण विषय है। सवाल यह है कि क्या संभव होने पर अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद या आसपास के जिलों में केंद्र उपलब्ध नहीं कराए जा सकते? यदि केंद्र दूर देना अपरिहार्य हो, तो परीक्षा की तारीख, केंद्र का पता और रिपोर्टिंग समय पर्याप्त पहले उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थी यात्रा की योजना बना सकें।


फिलहाल बदायूं के कितने अभ्यर्थियों को मेरठ या अन्य दूरस्थ जिलों में केंद्र आवंटित हुए हैं, इसकी आधिकारिक संख्या की पुष्टि आवश्यक है। इसी तरह अक्टूबर-नवंबर 2026 की परीक्षा तिथि और केंद्र आवंटन के आधिकारिक विवरण के आधार पर ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।


अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा केंद्र आवंटित करते समय दूरी, परिवहन सुविधा और आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखा जाए, ताकि किसी भी अभ्यर्थी को केवल लंबी यात्रा और अतिरिक्त खर्च के कारण परीक्षा देने में कठिनाई न हो।

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