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कुछ खास मामलों में पुलिस थानों में सीधे FIR दर्ज नहीं करेगी।।


यूपी में 31 मामलों में सीधे FIR नहीं होगी, पहले शिकायत फिर कोर्ट का आदेश जरूरी



उत्तर प्रदेश में अब कुछ खास मामलों में पुलिस थानों में सीधे FIR दर्ज नहीं करेगी। नई व्यवस्था के तहत इन मामलों में पहले केवल परिवाद (शिकायत) दर्ज की जाएगी, जिसके बाद मामला अदालत भेजा जाएगा। कोर्ट के निर्देश मिलने के बाद ही पुलिस केस दर्ज करेगी।


⚖️ क्या है नया नियम?


राज्य के राजीव कृष्ण (डीजीपी) ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में कानून के अनुसार सीधे FIR का प्रावधान नहीं है, वहां ऐसा करना गलत माना जाएगा।


इनमें करीब 31 तरह के मामले शामिल हैं, जिनमें दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़े केस भी आते हैं।


🏛️ हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद फैसला


यह निर्णय इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ की सख्त टिप्पणी के बाद लिया गया है।

25 फरवरी को अनिरुद्ध तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि कुछ धाराओं में सीधे FIR दर्ज करना कानून के अनुरूप नहीं है।


📜 कानून क्या कहता है?


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 219 के अनुसार,

अदालत तब तक संज्ञान नहीं ले सकती जब तक पीड़ित व्यक्ति स्वयं शिकायत न करे।


इसी तरह भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 से 84 के तहत आने वाले मामलों में भी यही प्रक्रिया लागू होती है।


🔍 क्या बदलेगा?


अब पीड़ित सीधे FIR दर्ज नहीं करा पाएंगे (इन खास मामलों में)

पहले शिकायत दी जाएगी

फिर मामला कोर्ट जाएगा

कोर्ट के आदेश के बाद ही FIR दर्ज होगी


⚠️ क्या हो सकती हैं चुनौतियां?

न्याय मिलने में देरी हो सकती है

पीड़ितों को अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा

पुलिस की भूमिका सीमित हो जाएगी




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निष्कर्ष

यह फैसला कानून के अनुसार प्रक्रिया को सही करने के लिए लिया गया है, लेकिन इसका असर आम लोगों—खासकर महिलाओं और पीड़ितों—पर कैसे पड़ेगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।

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