बदायूं में शिक्षा अधिकार की धज्जियां: कस्तूरबा विद्यालय में प्रवेश से इंकार, BSA के कथित आदेश का हवाला
बदायूं (सहसवान):
जनपद बदायूं के विकास खण्ड सहसवान क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खंदक स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में एक गंभीर लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आया है। संविलियन विद्यालय कोल्हाई से कक्षा 8 उत्तीर्ण पिछड़े वर्ग की एक बालिका को विद्यालय में प्रवेश देने से साफ इंकार कर दिया गया।
पीड़ित बालिका के पिता के अनुसार, विद्यालय के प्रधानाचार्य ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “जिले के अधिकारी एवं BSA का आदेश है कि केवल खंदक क्षेत्र की ही बालिकाओं को प्रवेश दिया जाएगा। यदि BSA लिखित आदेश दे देंगे तो ही एडमिशन किया जाएगा।”
यह बयान न केवल शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला है, बल्कि सरकार की उन योजनाओं पर भी सवाल खड़ा करता है जो बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही हैं।
उठ रहे बड़े सवाल:
क्या सच में ऐसा कोई शासनादेश जारी हुआ है जिसमें अन्य गांव की बालिकाओं के प्रवेश पर रोक हो?
यदि नहीं, तो प्रधानाचार्य किस आधार पर प्रवेश से मना कर रहे हैं?
क्या यह सीधा-सीधा भेदभाव और नियमों का उल्लंघन नहीं है?
पीड़ित परिवार ने न्याय की आस में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई है। साथ ही उस कथित शासनादेश को सार्वजनिक करने की मांग की है, जिसका हवाला देकर प्रवेश से इंकार किया जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में:
इस पूरे मामले में जब बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) बदायूं से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। प्रशासन की यह चुप्पी मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है।
मांग:
तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
बालिका का तुरंत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए
यदि कोई आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
निष्कर्ष:
सरकार जहां “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है, वहीं जमीनी स्तर पर इस तरह की घटनाएं व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। यदि समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न बन जाएगा।

एक टिप्पणी भेजें
Thanks for your suggestion.Our team will respond to your suggestion soon.