नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को कथित रूप से उनके आमरण अनशन स्थल से बलपूर्वक हटाए जाने के दावे के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर जारी बयान में इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया गया कि सादी वर्दी में पहुंचे लोगों ने उन्हें अचानक अनशन स्थल से हटाया। बयान में संबंधित अधिकारियों या कर्मियों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
बयान में यह भी मांग की गई है कि सोनम वांगचुक का उपचार न्यायिक निगरानी में कराया जाए। इसमें कहा गया है कि वांगचुक का जीवन पर्यावरण संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, विज्ञान, नवाचार और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बयान में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना करते हुए आरोप लगाया गया कि इस कार्रवाई से देश की लोकतांत्रिक और मानवीय छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचा है। साथ ही यह दावा भी किया गया कि सरकार की कार्यशैली संवाद के बजाय टकराव की राजनीति को बढ़ावा देती है।
बयान में यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों के जरिए युवा वर्ग वैचारिक रूप से अधिक संगठित हो रहा है और लोकतांत्रिक मुद्दों पर अपनी आवाज़ प्रभावी ढंग से उठा सकता है।
फिलहाल, इस मामले में संबंधित सरकारी एजेंसियों या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस बयान में लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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